Times of Crime Bhopal

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Monday, July 24, 2017

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के राज्य में मंत्रियों, अधिकारियों, सत्ता के दलालों और ठेकेदारों का रैकेट सक्रिय, चर्चाओं में

SHIVRAJ के लिए चित्र परिणाम
TOC NEWS // अवधेश पुरोहित

भोपाल । जिस प्रदेश की सत्ता के मुखिया की धर्मपत्नी द्वारा अपने पति के सत्ता की शपथ लेने के कुछ ही दिनों बाद ही अपनी पहचान छुपाकर डम्पर खरीदने की घटना को अंजाम दिया गया हो इस घटना के बाद इस शिवराज सरकार की शासन की स्थिति ‘पूत के पांव पालने में दिख जाते हैं की स्थिति बनी हो, क्या इस तरह की मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की धर्मपत्नी श्रीमती साधना सिंह के द्वारा खरीदे गये डम्पर के बाद राज्य की जनता में और प्रशासनिक हल्कों में बैठे अधिकारियों में किस प्रकार का संदेश गया होगा,

इसकी यदि व्याख्या की जाए तो स्पष्ट नजर आता है कि जो मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान राजनीति में दरिद्र नारायण की सेवा करने के लिये आये हों उनकी दरिद्र नारायण की सेवा क रने संकल्प लेकर सेवा में आये हों उसके नजारे तो राज्य की जनता और भाजपा के नेताओं ने शिवराज सरकार के १२ वर्षों के कार्यकाल के दौरान घटित घटनाओं से ही पता चल गया होगा कि वह किस प्रकार से दरिद्र नारायण की सेवा का व्रत लेकर सत्ता में आये और इस दौरान उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान कितने दरिद्र नारायणों की सेवा की यह जांच और शोध का विषय है।
यदि शिवराज सिंह चौहान के शासनकाल के शुरूआत से लेकर आज तक उनके शासन की कार्यप्रणाली पर नजर डाली जाए तो शायद ही ऐसा वर्ष या छमाही बची जिसके दौरान कोई न कोई घोटाला इस प्रदेश में न गूंजा हो चाहे फिर वह व्यापमं का मामला हो जिसके चलते हजारों छात्रों के भविष्य पर प्रश्नचिन्ह लग गया हो और उस व्यापमं की मामले की गूंज आज भी यदाकदा सुनाई देती है तो वहीं किसानों की खेती को लाभ का धंधा बनाने का शिवराज सिंह चौहान का ढिंढोरा भले ही किसानों की खेती को लाभ का धंधा न बना पाया हो
लेकिन रेत का धंधा प्रदेश सरकार के संरक्षण में इस तरह से चमका कि जिन ठेकेदारों ने इस प्रदेश की जीवन दायिनी नर्मदा से लेकर राज्य का शायद ही कोई कस्बा ऐसा बचा हो जहां यह रेत का धंधा जोरों से चल रहा हो और इन रेत के ठेकेदारों ने प्रदेश की नदियों से इतनी रेत निकाल ली कि अब उसमें मिट्टी ही नजर आ रही है लेकिन करोड़ों रुपये कमाने वाले इन ठेकेदारों पर जब सरकार द्वारा मुद्रांक में हुई गड़बड़ी को लेकर नोटिस जारी किया तो अब उनका ढूंढे से पता ही नहीं मिल पा रहा हो इस तरह की शासन की कार्यप्रणाली के चलते शिवराज सिंह के १२ वर्ष पूर्ण हुए लेकिन प्रदेश में भ्रष्टाचारियों को बक्शा ना जाएगा।
इस तरह के शब्दों को भी राज्य की जनता में मुख्यमंत्री के श्रीमुख से खूब सुना लेकिन इसके बावजूद भी इस प्रदेश में भ्रष्टाचार कम नहीं हुआ बल्कि भ्रष्टाचार के रूप में ली जाने वाली रकम जरूर कई गुना बढ़ गई तभी तो सतना नगर निगम के आयुक्त पचास लाख रुपये की रिश्वत लेत हुए धराए गए, मजे की बात यह है कि इन्हीं नगर निगम आयुक्त का शिवराज के करकमलों द्वारा सिंहस्थ में अच्छे काम के लिये सम्मान भी किया गया था तो इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि सिंहस्थ के दौरान उन्होंने क्या-क्या गुल खिलाए होंगे। यह सब घटनाएं इस बात की साक्षी हैं कि शिवराज सरकार की कार्यशैली किस प्रकार की रही,
मजे की बात यह है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जैसे-जैसे अधिकारियों पर भ्रष्टाचार में सख्ती बरतने का दिखावा किया वैसे-वैसे इस राज्य में भ्रष्टाचार की गंगोत्री अविरल बहती रही, आज स्थिति यह है कि उनके मंत्रीमण्डल के सदस्य अपने विभाग के प्रमुख की पदस्थापना को लेकर दो करोड़ का लेनेदेन करने अपने पीएम के माध्यम से लेने में नहीं चूकते हैं। इन दिनों राजधानी में जहां मुख्यमंत्री के कलेक्टरों को उल्टा टांगने के बयान को लेकर लोग जहां चटकारे लेकर चर्चा करते नजर आ रहे हैं
तो वहीं उनके ही मंत्रीमण्डल के एक मंत्री, पीए और हाल ही में हुए एक विभाग के विभाग प्रमुख के द्वारा तबादला के नाम पर किये गये कारनामे को लेकर भी तरह-तरह की चर्चाएं उक्त मंत्री के बंगले से लेकर उनके विभाग तक और विभाग से लेकर वल्लभ भवन के गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं। मजे की बात यह है कि उक्त मंत्री, पीए और विभाग प्रमुख के इस रैकेट के चलते जो खेल इस विभाग में तबादलों को लेकर किया गया
उसमें काफी लेनदेन की चर्चाएं जोरों पर हैं और इस लेनदेन को लेकर उक्त मंत्री के निवास में पदस्थ अधिकारियों और कर्मचारियों में एक जंग सी छिड़ गई और यही नहीं उक्त मंत्री के निवास में पदस्थ कुछ अधिकारियों ने तो मंत्री के समक्ष एक नोटशीट पेश कर उनकी वापसी की मांग की है, सूत्रों पर यदि विश्वास करें तो एक-दो अधिकारियों की वापसी की नोटशीट पर मंत्री ने तो दस्तखत कर दिये हैं बाकी कुछ ओर की वापसी की नोटशीट पर एक-दो दिन में दस्तखत हो जाने की चर्चा है
इसके साथ ही मंत्री और पीए के भजकलदारम् की नीति की चर्चा काफी दिनों से चल रही है जिसके चलते मंत्री के विभाग के कई कर्मचारियों के बीच इस बात को लेकर जंग जारी है कि मंत्री का उक्त चहेता पीए बिना भजकलदारम् के कोई काम नहीं करता फिर चाहे वो विभाग प्रमुख की पदस्थापना का मामला हो या फिर स्थानान्तरण का यही नहीं उक्त पीए की भजकलदारम् के प्रति इतना भक्त है कि पिछले दिनों मंत्री के परिजनों के साथ एक दुर्घटना में एक वाहन चालक की मौत हो गई थी और मंत्री द्वारा उक्त वाहन चालक के परिजनों को जो राशि पहुंचाई गई उसमें भी कटौती करने को लेकर मंत्री का पीए चर्चाओं में है,
मजे की बात यह है कि जहां एक ओर मंत्री का यह पीए अपनी भजकलदारम् की नीति के कारण मंत्री उसे अपनी दुधारू गाय मानकर चल रहे हैं तो वहीं मंत्री का स्टाफ और मंत्री के परिजन उक्त पीए के कारनमों से इतने परेशान हैं कि उन्हें वह फूटी आंख नहीं सुहाते क्योंकि मंत्री के परिजनों को यह डर है कि कहीं यह भांडा नहीं फूट जाए और मंत्री को बदनामी का दंश झेलना पड़े और वर्षों से उनकी त्याग, तपस्या और स्वच्छ राजनीति वाली छवि को बट्टा न लग जाए। 
जिस मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के राज्य में मंत्रियों, अधिकारियों, सत्ता के दलालों और ठेकेदारों का रैकेट सक्रिय था जो हर सरकारी योजनाओं में डाका डालने का काम करने में लगा था अब उन्हीं मुख्यमंत्री के कार्यकाल के दौरान मंत्री, पीए और विभाग प्रमुख का यह रैकेट चर्चाओं में हैं। देखना अब यह है कि जो मुख्यमंत्री अपने श्रीमुख से भ्रष्टाचारियों को बक्शा नहीं जाएगा जैसे बयान देकर प्रदेश की जनता को बहलाने की बात करते हैं, अब क्या वह उनके राज्य में पीए, मंत्री और विभाग प्रमुख के खिलाफ क्या कार्यवाही करते हैं, यह तो आनेवाला भविष्य ही बताएगा?

हरियाली अमावस्या के अवसर पर लगभग 4500 से अधिक पौंधे रोपे गये

SHIVRAJ के लिए चित्र परिणाम
TOC NEWS // अवधेश पुरोहित

भोपाल । जिस प्रदेश की सत्ता की कमान संभालने के कुछ ही दिनों बाद सत्ता के मुखिया शिवराज सिंह चौहान की धर्मपत्नी द्वारा अपनी पहचान छुपाकर डम्पर खरीदने की घटना से हुई हो उसी भाजपा के सत्ता के मुखिया शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल के दौरान कितने घोटालों को अंजाम इस राज्य की नौकरशाही के द्वारा दिया गाय हो तो वहीं जिन प्रदेश के किसानों के हितैषी बनकर उनकी खेती-किसानी को लाभ का धंधा बनाने का ढिंढोरा पीटे जाने के बावजूद भी राज्य का अन्नदाता की खेती-किसानी लाभ का धंधा तो नहीं बन पाई, हाँ, यह जरूर है कि इस प्रदेश में सरकारी संरक्षण में खेत का नहीं बल्कि रेत का धंधा खूब फला-फूला और आज स्थिति यह है कि सरकार के लाख प्रयास के बावजूद भी इस रेत के खेल को यह सरकार रोकने में नकायाब नजर आ रही है
इसकी भनक मुख्यमंत्री के इस बयान से साफ झलकती है कि रेत चोरी के मामले में मुख्यमंत्री कहते हैं कि हर घाट पर अब बंदूकधारी तो तैनात नहीं किये जा सकते, मुख्यमंत्री का इस तरह के बयान के मायने तलाशने में हर कोई लगा हुआ है, कुल मिलाकर राज्य के राजनैतिक पंडित मुख्यमंत्री के इस बयान पर तरह-तरह की चर्चाएं करते नजर आ रहे हैं तो वहीं वह यह कहते भी नजर आ रहे हैं कि राज्य में कलेक्टर नाम का क्या कोई पद है।
क्योंकि शिवराज सरकार के कार्यकाल के दौरान यह कलेक्टर विकास अधिकारी बनकर रह गए तभी तो राज्य में राजस्व से जुड़े हजारों मामले लम्बित पड़े हुए हैं तो वहीं राज्य के प्रमुख सचिव राजस्व विभाग के अधिकारियों से लेकर पटवारी तक जमीन के रकबे के हिसाब से रिश्वत मांगने जैसी शिकायतों का भी अंबार लगा हुआ है, मजे की बात यह है कि जिस प्रदेश में प्रति मंगलवार को जनसुनवाई होता हो उस मध्यप्रदेश में ५२ हजार ७८४ मामलों का निराकरण वर्षों से नहीं हो पाया इन मामलों के अलावा नामांतरण, सीमांकन, बंटवारे, निजी भूमि पर अतिक्रमण सहित साढ़े तीन लाख मामले लंबित हैं
तो वहीं बंटवारे के ४३६९१, सीमांकन के ११५१५, निजी भूमि पर अतिक्रमण के १४३३८ मामले अटके पड़े हैं, इस संबंध में राज्य के अफसरों का कहना है कि पटवारी के नौ हजार पद खाली हैं इसी तरह तहसीलदार और नायब तहसीलदारों की कमी भी लगातार बनी हुई है इन सबसे अलग हटकर बात तो यह है कि जिन मुख्यमंत्री के मंत्रीमण्डल के साथी उमाशंकर गुप्ता पर राजस्व विभाग की कमान है, उनकी रुचि हमेशा दूसरों में खामियां निकालने और दूसरे के कामों में अड़ंगा डालने की रही है, वह जब भाजपा के विधायक हुआ करते थे तो उस समय तत्कालीन मुख्यमंत्री उमा भारती के कार्यकाल के दौरान उनके मंत्रीमण्डल के साथी परिवहन मंत्री ढालसिंह बिसेन के विभाग में उन्हें खामियां नजर आई थीं
तो उस समय उन्होंने विधानसभा में एक ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के माध्यम से तत्कालीन परिवहन मंत्री की कार्यशैली पर यह कहकर सवाल खड़े किये थे कि राज्य की सीमाओं पर तैनात परिवहन चौकियों पर बाहर के ट्रकों से २४०० रुपये और मध्यप्रदेश के ट्रकों से १२०० रुपये की विधिवत वसूली पूर्ववर्ती सरकार की तरह की जा रही है, यही नहीं जब वह इसी भाजपा शासनकाल के दौरान परिवहन मंत्री बने तो ऐसा कुछ उन्होंने इस विभाग में परिवर्तन नहीं लाया जिससे यह लगे कि उमा भारती के मंत्रीमण्डल के सदस्य तत्कालीन परिवहन मंत्री की कार्यप्रणाली पर उठाये गये सवालों से उन्होंने कोई राहत दिलाने का काम किया हो, मजे की बात यह है कि उनके स्वयं के कार्यकाल के दौरान परिवहन चौकियों पर किस तरह की वसूली का दौर चलता रहा यह उन्हें ही मालूम है
लेकिन इसके बाद जब परिवहन विभाग की कमान जगदीश देवड़ा के पास आई तो राज्य के गृह मंत्री होने के नाते पुलिस विभाग से परिवहन विभाग में प्रतिनियुक्ति पर जाने वाले आरक्षक से लेकर अधिकारियों तक के मामले में टांग अड़ाने का काम किया और आज जब उनके हाथों में राजस्व विभाग की कमान है और सभी जानते हैं कि किसानों का नाता जितना राजस्व विभाग से पड़ता है और यह किसान राजस्व विभाग के अधिकारियों से पीडि़त, शोषित और अपमानित हैं वैसे किसी शायद अन्य विभाग से नहीं होते लेकिन उनकी रुचि अपने विभाग के पटवारी से लेकर राजस्व विभाग के अधिकारियों को सुधारने की नहीं बल्कि अपनी आदत अनुसार वह राजधानी में स्थित स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत आने वाले चिकित्सालयों की व्यवस्था सुधारने में लगे हुए हैं। मुख्यमंत्री ने जहां कलेक्टरों को उल्टा टांगने का बयान तो दिया लेकिन क्या कभी अपने इस तरह के अपने विभाग की लापरवाही बरतने वाले मंत्रियों के खिलाफ भी कुछ कार्यवाही करने की पहल की है।
वैसे भी कहा जाता है कि पहले अपना घर देखो बाद में दूसरे को संदेश दो। लेकिन मुख्यमंत्री के कलेक्टरों को उल्टा टांगने के बयान से यह साफ जाहिर हो जाता है कि उनकी पकड़ अपने मंत्रिमण्डल के साथियों पर नहीं है तभी तो उमाशंकर गुप्ता जैसे मंत्री जिने पास राजस्व जैसा महत्वपूर्ण विभाग है वह राजस्व विभाग जिसके बारे में यह कहा जाता है कि यह सभी समस्याओं की जड़ है उस विभाग को सुधारने के प्रति नहीं बल्कि राजधानी के अस्पतालों की व्यवस्था के प्रति कुछ ज्यादा ही रुचि है, पता नहीं इन अस्पतालों की व्यवस्था सुधारने के प्रति उनकी क्या रुचि है, यह वही जानें? लेकिन मुख्यमंत्री द्वारा कलेक्टरों को उल्टा टांगने के बयान को लेकर जिस तरह की बहस इन दिनों प्रदेश की राजनीतिक हलकों में छिड़ी हुई है
उस बहस को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं व्याप्त हैं और लोग यह कहते नजर आ रहे हैं कि पहले अपना घर तो सुधार लें फिर कलेक्टरों को उल्टा टांगें, इन सभी मुद्दों और मुख्यमंत्री के अपने कार्यकाल के दौरान उनके जुमलों और धमकियों पर सिलसिलेवार ब्यौरा देते हुए राजधानी के वरिष्ठ पत्रकार रघवेन्द्र सिंह ने दैनिक नया इंडिया में अपने नियमित कालम ‘न काहू से बैर में मुख्यमंत्री की कार्यशैली पर जो सटीक टिप्पणी की है उनके अनुसार मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पिछले कुछ सालों से अपनी सरकार के साथ ही संघर्ष के मोर्चे पर हैं। राजनीतिक मामलों तो वे उस्ताद हैं। सो उन्होंने अपने सभी विरोधियों को हाशिए पर ला दिया है, लेकिन प्रशासन के मोर्चे पर उनकी लाचारी अब कुंठा क्षोभ गुस्से में बदलने लगी है। भाजपा कार्यसमिति की बैठक में उन्होंने कलेक्टरों की कलेक्टरी सिखा दूंगा और कलेक्टरों को उल्टा टांग दूंगा जैसी बात कहकर अपनी बेबसी को अपनो के बीच बयां किया है।
पहले उनकी इस तरह की बातों पर डंडा लेकर निकाला हूं, नौकरशाही को ठीक कर दूंगा जैसे जुमलों पर जनता उन्हें अपने हीरो के रूप में देखती थी और तालियां बजाती थी मगर हालात सुधरने के बजाए बिगड़ते जा रहे हैं। गुड गवर्नेंस देने और खेती को लाभ का धंधा बनाने का सपना दिखाने वाले मुख्यमंत्री की विश्वसनीयता पर सवाल उठने लगे हैं। भरोसे का टूटना सत्ता संगठन, के साथ आम जनता के बीच एक सरकार के असफल होने का संदेश लेकर जा रहा है। शिक्षा, स्वास्थ्य, रेत, चोरी, किसानों की आपदा जैसे मामलों में सरकार की असफलता ने मुख्यमंत्री धैर्य तोड़ दिया है। इन क्षेत्रों में अच्छे दिन आ नहीं रहे और सुधार की कोई सूरत नजर नहीं आती। मंदसौर किसान गोलीकांड से शिवराज सरकार और भाजपा दोनों ही लगातार बैकफुट पर हैं।
प्रदेशप्रभारी विनय सहस्त्रबुद्धे ने अपना ध्यान राज्य से लगभग हटा लिया है। लंबे समय बाद वे प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में नजर तो आए मगर उपस्थिति बेअसर सी रही। इसी तरह संगठन महामंत्री सुहास भगत भी सरकार के साथ संगठन के कामों को लेकर उदासीन अखाड़े में बने हुए हैं। अकेले प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान मुख्यमंत्री आरएसएस को साधने के लिए शिक्षा विभाग की न केवल आलोचना करते हैं बल्कि यह तक कह देते हैं कि उनका वश चले तो संघ से जुड़े शिक्षा प्रकल्प को सौंप दें। इससे संघ भले ही खुश हो जाए मगर सरकार के मुखिया के नाते उनका ये बयान आलोचना का सबब बन गया है। इस तरह के बयानों का सिलसिला थम नहीं रहा है।
मुख्यमंत्री रेत चोरी के मामले में कहते हैं हर घाट पर अब बंदूकधारी तो तैनात नहीं किए जा सकते। इसका मतलब उन्होंने रेत चोरी के लिए सुरक्षित रास्ता दे दिया है। भ्रष्टाचार में जीरो टालरेंस पर भी सरकार और प्रशासन लगातार पिट रहा है। हाल ही में प्याज खरीदी को लेकर भी घोटाले समाने आने लगे हैं। करोड़ों रुपए की प्याज बिना किसी इंतजाम के खरीदी और सड़ा दी गई। व्यापमं के बाद कि सान गोलीकांड और प्याज घोटाले में सरकार की असफलता भाजपा से लेकर आमजनता में चर्चा का विषय है। सबसे खास बात ये है कि संतुलित और गंभीर मुद्दों पर चुप रहने वाले मुख्यमंत्री अब हलकी भाषा के इस्तेमाल पर उतर आए हैं।
राजनीतिक पीडि़त उनके व्यवहार में आए बदलाव के मायने निकाल रहे हैं। कुछ का अनुमान है पार्टी के भीतर ही उनके खिलाफ साजिश हो रही है। दिल्ली में उनकी छवि संगठन के कुछ नामचीन नेता योजना बनाकर खराब कर रहे हैं। मुख्यमंत्री का पक्ष अधिकारियों पर नियंत्रण नहीं होने के कारण कमजोर हो रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को कमजोर प्रशासनिक पकड़ और रेत खनन तथा प्याज खरीदी जैसे मामलों में भ्रष्टाचार को लेकर लगातार रिपोर्टिंग की जा रही है। कांग्रेस की तुलना में मुख्यमंत्री और उनकी सरकार अपनों को टारगेट पर ज्यादा है। चिन्ता की असली वजह भी यही बताई जा रही है। अगस्त के महीने में कुछ बड़े फैसले आने की अफवाहें हैं। 
कुल मिलाकर राज्य में इन दिनों जो कुछ चल रहा है वह इस शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल के प्रारंभ में उनके सत्ता पर काबिज होते ही उनकी धर्मपत्नी श्रीमती साधना सिंह ने अपनी पहचान छुपाकर डंपर खरीदकर जो इस प्रदेश की जनता, अधिकारियों, भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं को जो संदेश देने काम किया था उनकी इस संदेश को जो लोग समझ गए आज वह करोड़ों में खेल रहे हैं और उनके इस संदेश में छुपे इस अर्थशास्त्र को जिन लोगों ने समझा आज वह चाहे अधिकारी हों या भाजपा के वह नेता और कार्यकर्ता जिनके पास कभी टूटी साइकिलें तक नहीं थीं आज वह इस शिवराज सरकार में बह रही भ्रष्टाचार की गंगोत्री में डुबकी लगाकर आलीशान भवनों और लग्जरी कारों में फर्राटे लेते नजर आ रहे हैं शिवराज सरकार के इस अर्थशास्त्र को इस प्रदेश की जनता या भाजपा के नेता भले ही न समझे हों लेकिन जो समझ गये वह आज चैन में हैं।

बेटी शर्मिष्ठा करेंगी अब प्रणव मुखर्जी की देखभाल



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नई दिल्लीः राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी 25 जुलाई को देश के प्रथम नागरिक से पूर्व राष्ट्रपति हो जाएंगे। इसके साथ ही रायसीना हिल स्थित 320 एकड़ में विस्तीर्ण 340 कमरों वाला भव्य राष्ट्रपति भवन उनका पूर्व पता हो जाएगा और लुटियन दिल्ली में राजाजी मार्ग स्थित 8 बैडरूम वाला 10 नंबर बंगला प्रणव दा का स्थायी पता बन जाएगा। प्रणव मुखर्जी की बेटी शर्मिष्ठा ने देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद से पिता के सेवानिवृत्त होने के बाद उनकी देखभाल का दायित्व संभालने का फैसला किया है। अपने पिता के साथ ही राजाजी मार्ग स्थित घर में वह भी शिफ्ट हो जाएंगी।

रविवार को विदाई समारोह में निवर्तमान राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने खुद को ‘संसद की देन’ करार देते हुए कहा कि संसदीय जीवन में उन्हें कई नेताओं से बहुत कुछ सीखने को मिला। संसद भवन के केंद्रीय कक्ष में आयोजित विदाई समारोह में मुखर्जी ने कहा कि जब मैंने पहली बार लोकतंत्र के इस मंदिर में कदम रखा था तब मेरी उम्र 34 साल थी।

मैं 37 साल तक किसी न किसी सदन का हिस्सा रहा। यदि मैं यह दावा करूं कि मैं इस संसद की देन हूं तो यह अभद्रता कतई नहीं होगी। उदासी के भाव के साथ मैं अब आलीशान भवन को अलविदा कहूंगा। बता दें कि राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी के कार्यकाल का आज आखिरी दिन है। मंगलवार को रामनाथ कोविंद देश के 14वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ ग्रहण करेंगे।

Sunday, July 23, 2017

जनता परेशान, शौच के लिए जाएंगे तो जाएंगे कहां



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जगदलपुर: स्वच्छ भारत मिशन के तहत खुले में शौच मुक्त इलाका बनाए जाने को लेकर चल रहे सरकारी प्रयासों के बीच निगम ने शहर में जो नया प्रयास चालू किया है यह कितना सार्थक होगा इसे समझने की आवश्यकता है। फिलहाल निगम आयुक्त ने 48 वार्डों में निगम के कर्मचारी व अधिकारियों को तैनात किया है। इन्हें सुबह पांच से सात बजे तक अलग-अलग वार्ड में घूमना है और इस दौरान खुले में शौच करने वालों को सिटी बजाकर जागरूक करना है।

ऐसे लोगों की परेशानी और समस्या को निगम के कर्मचारी जानेंगे और उन्हें खुले में शौच के नुक्सान से अवगत करवाएंगे। इस पहल के बीच शहर में एक बात और निकलकर सामने आ रही है कि निगम प्रशासन ने पहले अपनी ही व्यवस्था को दुरूस्त नहीं किया है। ऐसी बसाहट जो निगम ने मुहैय्या करवाई है वहीं पर शौचालय को लेकर सार्थक पहल नहीं हुई है। अटल आवासों में ही सेप्टिक टैंक चोक है। ऐसे में इन इलाकों के रहवासियों का कहना है कि शौच के लिए वे कहां जाएं। अंदर व्यवस्था नहीं है और बाहर जाने पर निगम के कर्मचारी अब सिटी बजा रहे हैं।

आयुुक्त निगम एके हलदार की मानें तो स्वच्छ भारत मिशन के तहत हमने जब पहल शुरू की है तो इन बातों को सामने लाया जा रहा है। जब परेशानी थी तो इसको लेकर शिकायत पहले नहीं की गई। हमारा उद्देश खुले में शौच को रोकना है साथ ही व्यवस्था को भी सही करने को लेकर पहल जारी है। गुरुवार को निगम के 48 वार्डों में निगम कर्मचारियों ने अपनी तैनाती के अनुसार खुले में शौच करने वाले करीब सौ से अधिक लोगों को सचेत किया और उन्हें अवगत करवाया कि इससे क्या नफा नुकसान होगा। निगम कर्मियों ने खुले में शौच करने वालों को यह भी बताया कि यदि उन्हें घर में शुष्क शौच चाहिए तो वे निगम में आवेदन दे सकते हैं।

गंगामुडा, दलपत सागर, प्रवीर वार्ड, लालबाग, धरमपुरा, राजेन्द्र नगर वार्ड, बोधधाट थाना रोड, महारानी वार्ड, पल्ली नाका, कुम्हारपारा, डोंगाघाट व अन्य क्षेत्रों मे खुले में शौच जाने वाले को जागरूक किया गया, साथ ही वार्डों में जहां शौचालय निर्माण संबंधी समस्या उत्पन्न हुई वहां पर सुबह से कार्यपालन अंभियता अजीत कुमार तिग्गा ने दौरा किया।

निजी शौचालय निर्माण की समस्या वार्ड के लोगों ने बताया इस पर ईई ने नाम लिखकर जल्द शौचालय निर्माण करने की बात कही। वहीं आयुक्त एके हलधर ने बताया स्वच्छ भारत मिशन के तहत शहर को खुले में शौच मुक्त करने के लिये लोगों में जागरूकता लाने के लिये निगम के अधिकारी व कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है जो खुले में शौच करने वाले लोगों को जागरूक कर उनकी समस्या दूर करेंगे तथा यह अभियान लगातार जारी रहेगा।

जवान ने गर्भवती पत्नी से बात करने के बाद खुद को मार ली गोली Daily Bihar News 23 Jul. 2017 20:02




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छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में एसएसबी के 33वीं बटालियन के जवान चंद्रभान कुमार ने गर्भवती पत्नी से बात कर खुद को गोली मार ली जवान ने अपनी राइफल से गर्दन के पास गोली मारी जो सिर को पार निकल गई। गोली की आवाज सुन आसपास मौजूद साथी जवान पहुंचे तो देखा कि चंद्रभान का शव बेड पर पड़ा और वहां खून फैला है. घटना शुक्रवार को छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले के बर्रेबेड़ा हवेचुर में घटी.

मोतियाबिंद की बीमारी से पीड़ित पिता अपनी धुंधली नजर से बेटे के आने की राह देख रहे थे. बेटे ने कहा था कि छुट्टी मिल गई है जल्द ही घर आऊंगा और आपका ऑपरेशन करा दूंगा
रविवार सुबह वह अपने वादे के अनुसार घर तो आया लेकिन ताबूत में बंद होकर. शव देखते ही पिता चीखने लगे. वह कह रहे थे, मेरा बेटा कुछ बोल क्यों नहीं रहा है?

यह सोया क्यों है? अब मेरी आंख का ऑपरेशन कौन कराएगा? चंद्रभान बिहार के पश्चिम चम्पारण जिले के बगहा के बेरई नवरंगिया गांव का रहने वाले थे. चंद्रभान ने खुद को गोली मारने से पहले पत्नी से बात की थी. वह कुछ दिनों से परेशान थे. उसने पत्नी से माता-पिता की खैरियत पूछी थी. जवान ने यह कहते हुए फोन रख दिया था कि मैं अभी नहाने जा रहा हूं, दोबारा कॉल करता हूं. करीब दो घंटे बाद भी कॉल नहीं आया तो पत्नी ने फोन किया.



जवान का फोन मेजर ने उठाया और घटना की जानकारी दी. गोली चलने की आवाज सुनकर साथी जवान बैरक में पहुंचे खुदकुशी के कारणों का अभी तक पता नहीं चला है. साथी जवान भी कोई जानकारी नहीं दे पा रहे हैं. जवान के मोबाइल से ही कुछ डिटेल मिल सकती थी, लेकिन मोबाइल का डाटा डिलीट कर देने से अब पुलिस की मुश्किलें बढ़ गई हैं.

बुढ़ापे में छिन गया सहारा बेटे की मौत के बाद चंद्रभान के पिता रामनारायण महतो सदमे में हैं शव देख वह बार-बार कह रहे हैं मेरा बेटा मेरी आंखों का तारा था. ऐसे कैसे मुझे छोड़कर जा सकता है. चार साल पहले चंद्रभान का एसएसबी में चयन हुआ था. तीन बहनों और दो भाइयों में वह सबसे छोटा था. चंद्रभान मेरे जीने का सहारा था.

चार माह में उजड़ गया मांग का सिंदूर. चंद्रभान की शादी प्रिया के साथ 8 मार्च 2017 को हुई थी. शादी के 4 माह बाद ही प्रिया के मांग का सिंदूर उजड़ गया.पत्नी (प्रिया) यह कह कर बदहवास हुए जा रही है कि आखिर अब मैं किसके सहारे जीऊंगी, मैं भी मर जाना चाहती हूं.

पिता की आंख के ऑपरेशन के लिए ली थी छुट्टी

जवान के पिता मोतियाबिंद से पीड़ित थे. उन्होंने अपने पिता की आंख का ऑपरेशन कराने के लिए छुट्टी ली थी. जवान की 24 जुलाई से छुट्टी स्वीकृत की गई थी. वह 23 जुलाई को बर्रेबेड़ा हवेचुर कैंप से भिलाई हेड क्वाटर के लिए रवाना होने वाले थे और घर जाने से पहले दुनिया छोड़कर चला गया.

वह गिड़गिड़ाती रही पर रसूलाबाद थानाध्यक्ष भूपेंद्र सिंह राठी नाबालिग से करते रहे रेप



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वो गिड़गिड़ाती रही पर उसकी सुनने वाला कोई नहीं था. घर में अकेली पाकर जनता के रक्षक कहे जाने वाले वहसी दरिंदों ने एक नाबालिग लड़की के साथ क्रूरता की सारी हदें पार कर दीं. घटना कानपुर देहात के रसूलाबाद की हैं. जहां एक पुलिस  इंस्पेक्टर ने पुलिस विभाग को शर्मसार कर दिया.

इंस्पेक्टर भूपेंद्र राठी ने एक नाबालिग लड़की को गांव से बाहर पुलिस स्टेशन ले जाकर उसके साथ रेप किया. थानेदार गांव के एक युवक की हत्या के मामले में गवाही के लिए लड़की को अपने साथ ले गया था फिर उसके साथ रेप किया.

गवाही के बहाने एक 15 साल की नाबालिग लड़की के साथ दुष्कर्म करने के साथ ही उससे डराया और धमकाया भी.
लड़की दर्द से चीखती चिल्लाती रही पर उसकी कोई सुनने वाला नहीं था. अंतत: बेहोश हो जाने पर उसे पास के ही अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराया. साथ ही उससे यह भी कहा कि अगर उसने यह बात किसी और को बताई तो उसके लिए अच्छा नहीं होगा.

क्या था मामला –

लड़की का कहना है कि गांव के ही एक युवक ने आत्महत्या कर ली थी. जिसकी गवाही देने के लिए पुलिस वाले ने उसे थाने ले गए. पूछताछ के बहाने थानेदार भूपेंद्र राठी ने रात में उसे अपने कमरे में बुलाकर सुसाइड केस में फंसाने की धमकी देकर उसके साथ रेप जैसा घिनौना काम किया. लड़की ने अपनी सारी आपबीती अपने पिता के साथ कानपुर आईजी आलोक सिंह को बताया.


जहां एक ओर सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ ने एंटी रोमियो स्क्वॉएड का गठन कर सूबे की महिलाओं को सुरक्षा का एहसास कराने का प्रयास किया, लेकिन यहां तो जिनके जिम्मे महिलाओं की सुरक्षा का जिम्मा है वो ही महिलाओं के साथ ऐसी वहशियाना हरकतों को अंजाम दे रहे हैं. इनके जैसे थानेदारों के कुकृत्य से पुलिस विभाग तो बदनाम होता ही है इसके साथ ही साथ सरकार को भी बदनामी झेलनी पड़ती है. साथ ही लोगों का विशेषतौर पर महिलाओं का पुलिस प्रशासन से भरोसा उठ जाता है.



योगी जी को इस तरह की घटना के जिम्मेदार लोगों को कड़ी से कड़ी कार्रवाई कर विभाग में ये संदेश देना चाहिए कि इस तरह की घटनाओं के बाद आरोपी कोई भी हो कड़ी कार्रवाई का सामना करना ही पड़ेगा. इससे जनता पर भी सरकार का भरोसा बढ़ेगा. पर दुर्भाग्य की बात ये है कि सरकारें चाहे जो रही हों ऐसी घटनाओं के बाद फौरन ही एक विभागीय अधिकारियों की कमेटी बनाकर उसे जांच सौंप दी जाती है. 

उसके बाद वही खानापूरी और आरोपी फिर से जनता के बीच में और इस बार तो उसका आत्मविश्वास और बढ़ा होता है कि वो चाहे जो करे उसका कुछ नहीं होने वाला है. इसके अलावा घटना के कुछ दिनों बाद वैसे ही मामला ठंडा हो जाता है और लोग उसे भूल जाते हैं. ऐसे लोगों को इस बात का भी फायदा मिलता है.

Saturday, July 22, 2017

भूलकर भी इस शहर में कबाब मत खाईएगा.. होटलों में सप्लाई हो रहा था मृत पशुओं का मीट

Supply of kebabs to the hotels was going on dead animals
TOC NEWS // ( टी ओ सी न्यूज )
कबाब के लिए होटलों में सप्लाई हो रहा था मृत पशुओं का मीट

मेरठ में कंजर वाले पुल पर पकड़ा गया मिनी कमेला

मेरठ। कमेला रोड के पास बृहस्पतिवार दोपहर झुग्गी झोपड़ियों में मृत पशुओं का कटान पकड़े जाने के बाद बखेड़ा हो गया। दूसरे समुदाय के लोगों ने दो आरोपियों को जमकर पीटा। झोपड़ियों में तोड़फोड़ कर आगजनी की कोशिश की। दो घंटे बाद लिसाड़ी गेट मौके पर पहुंची तो भीड़ ने घेराव कर नारेबाजी कर दी।

लिसाड़ी गेट थाना क्षेत्र में कमेला रोड से सटे नाले पर कंजर वाले पुल के पास पिछले कुछ दिनों से दूसरे समुदाय के लोग लगातार पुलिस से शिकायत कर रहे थे। इनका कहना था कि झुग्गी झोपड़ियों में कुछ लोग अवैध तरीके से पशुओं का कटान कर रहे हैं। बृहस्पतिवार दोपहर काले दादा की झोपड़ी में दूसरे समुदाय के लोग पहुंचे तो वहां भारी संख्या में पशुओं के अवशेष थे। 
इस बीच भीड़ जुट गई और हंगामा कर दिया। भीड़ ने झोपड़ी से दो युवकों को पकड़कर पीट दिया। जबकि मौके से दो महिलाओं समेत करीब दस लोग फरार हो गए। कंट्रोल रूम की सूचना पर काफी देर बाद यूपी 100 की गाड़ी पहुंची। जबकि हंगामा होने के बावजूद लिसाड़ी गेट पुलिस एक घंटे तक नहीं पहुंची। बाद में पहुंचे सीओ कोतवाली रणविजय सिंह ने भीड़ को शांत कराया। सीओ के अनुसार झोपड़ी से करीब 150-200 पशुओं के अवशेष मिले है। जिनके पशु चिकित्सक बुलाकर सैंपल भरवाने के बाद जमीन में दबवा दिया गया।
सीओ कोतवाली रणविजय सिंह ने बताया कि जांच में सामने आया कि यह गिरोह जिंदा कटरा, भैंस की आड़ में मृत पशुओं को काटकर कबाब के लिए सप्लाई कर रहा था। पकड़े गए दोनों आरोपियों से पूछताछ चल रही है।

एसओ के खिलाफ नारेबाजी

सीओ कोतवाली के सामने भड़की भीड़ ने लिसाड़ी गेट पुलिस की मिलीभगत से अवैध कटान का आरोप लगाकर एसओ के खिलाफ नारेबाजी कर दी। भीड़ एसओ लिसाड़ी गेट को मौके पर बुलाने की मांग पर अड़ गई। समझाने की कोशिश पर भीड़ ने सीओ से कहा कि एक माह से लगातार पुलिस से शिकायत करने के बावजूद लोगों को टरका दिया जाता था। आरोप लगाया कि एसओ लिसाड़ी गेट की मिलीभगत से यहां के लोगों का जीना दुश्वार हो रहा है। सीओ ने कहा मामले में जांच करा रहे हैं।

रात में लाए जाते थे पशु

पड़ोस में रहने वाले सलीम, जावेद, चांद मोहम्मद, मोहम्मद इरफान आदि ने सीओ को बताया कि रात को आसपास के लोगों के सो जाने पर आरोपी छोटे पशुओं के अलावा भैंस, भैंसा लाते थे। इनमें एक आरोपी पर मृत पशुओं का ठेका भी बताया गया। पुलिस का मानना है कि जिंदा पशुओं की आड़ में मृत पशुओं को रात में लाकर झुग्गी झोपड़ियों में काटा जा रहा था।

ममता का विवादित बयान, कहा- दो गुंडे मिलकर चला रहे हैं देश को

ममता बनर्जी के लिए चित्र परिणाम
TOC NEWS // ( टी ओ सी न्यूज )
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की नेतृत्व वाली तृणमुल कांग्रेस केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ 9 अगस्त से भारत छोड़ो बीजेपी आंदोलन की शुरूआत करेगी। सीएम ममता ने पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि आज देश में आपातकाल से भी ज्यादा बुरे दिन आ गए हैं। 
लोग गोरक्षा के नाम पर गो राक्षस बनते जा रहे हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, उन्होंने कहा कि आज परिस्थिति इस कद्र उत्पन हो चुकी है कि अमर्त्य सेन जैसे लोग भी सुरक्षित नहीं हैं। तृणमुल कांग्रेस अध्यक्ष ने साफ कर दिया कि बीजेपी और भगवा दल से कोई भी राजनैतिक दल लड़ेगा तो मैं उनके साथ खड़ी हूं।
ममता यहीं नहीं रुकी, उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को गुंडा तक कह डाला। कहा कि कुछ गुंडे लोग मिलकर इस देश को चला रहे हैं। देश में कौन क्या खाएगा औऱ क्या करेगा, बस यही लोग तय कर रहे हैं। जबकि बीजेपी के कई नेता भ्रष्टाचार में लिप्त हैं। उन्होंने हमला बोलते हुए कहा कि उनके नेता के खिलाफ सीबीआई और ईडी कोई कार्रवाई क्यों नहीं करती है। 

मंत्री ने जूते निकाले, गाली दी, और ऑफिस जलाने की धमकी दी, अधिकारी ने की लिखित शिकायत

मंत्री ने जूते निकाले, गाली दी, और ऑफिस जलाने की धमकी दी, अधिकारी ने की लिखित शिकायत के लिए चित्र परिणाम
TOC NEWS // ( टी ओ सी न्यूज )
कोंडागांव। कोंडागांव में एक अधिकारी उद्योग महाप्रबंधक एसआर एल्मा ने मंत्री केदार कश्यप के खिलाफ गालीगलौज करने, जूते निकालकर मारने और ऑफिस जलाने की धमकी देने का आरोप लगाया है.
दरअसल, शुक्रवार की शाम रेस्ट हाऊस में मंत्री केदार कश्यप कार्यकर्ताओं की बैठक ले रहे थे. कार्यकर्ताओं की शिकायत पर उन्होंने ऐसी नाराज़गी दिखाई कि सबके होश उड़ गए. जानकारी के मुताबिक  एक कार्यकर्ता ने मंत्री से शिकायत की कि उन्होंने एक कार्यकर्ता से 5 हज़ार की रिश्वत मांगी.
इस पर उन्होंने अधिकारी से जवाब मांगा. अधिकारी ने कहा कि उन्होंने रिश्वत की मांग नहीं की थी. केवल उस कार्यकर्ता से कहा था कि प्रोजेक्ट जाकर किसी सीए के पास बनवा ले. जो करीब 5 हज़ार रुपये में बन जाएगा. जानकारी के मुताबिक इसके बाद उन्होने अपना जूता उतार लिया और गालीगलौज करके अधिकारी को धमकाने लगे.
मंत्री यहीं नहीं रुके. इसके बाद बिजली विभाग के एक अधिकारी नवीन कोयम के खिलाफ भी उनका गुस्सा ऐसे ही भड़का. आरोप है कि उन्होंने उससे भी गालीगलौज की. एल्मा ने इसकी शिकायत कलेक्टर से करने के बाद समाज में करने की बात कही है. एल्मा ने इसकी लिखित शिकायत कलेक्टर समीर बिश्वोई से की है. बिश्नोई ने मीडिया से बातचीत में शिकायत मिलने की बात मानी है.
इधर, इस मसले पर नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव ने आपत्ति जताई है. उनका कहना है कि मंत्री के पास अधिकारी के खिलाफ शिकायत का अधिकार होता है लेकिन उसे सार्वजनिक तौर पर प्रताड़ित नहीं किया जा सकता.
इस मामले में मंत्री केदार कश्यप की प्रतिक्रिया नहीं मिल पाई है.

भारत के लिए चिंताजनक, सेना के पास महज 10 दिनों की लड़ाई के लिए ही है गोला-बारूद

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TOC NEWS // ( टी ओ सी न्यूज )

संसद में रखी गई नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में बताया गया कि कोई युद्ध छिड़ने की स्थिति में सेना के पास महज 10 दिन के लिए ही पर्याप्त गोला-बारूद है. चीन की सरकारी मीडिया ने कहा कि अपनी जमीन का एक इंच हिस्सा खोना भी बर्दाश्त नहीं कर सकता. एक साथ पढ़िए पांच बड़ी खबरें.

संसद में रखी गई नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) के लिए चित्र परिणाम

भारतीय सेना इन दिनों गोला-बारूद की भारी कमी से जूझ रही है. संसद में रखी गई नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में बताया गया कि कोई युद्ध छिड़ने की स्थिति में सेना के पास महज 10 दिन के लिए ही पर्याप्त गोला-बारूद है. संसद के समक्ष शुक्रवार को रखी गई कैग की रिपोर्ट में कहा गया कुल 152 तरह के गोला-बारूद में से महज 20% यानी 31 का ही स्टॉक संतोषजनक पाया गया, जबकि 61 प्रकार के गोला बारूद का स्टॉक चिंताजनक रूप से कम पाया गया.
चीन की सरकारी मीडिया ने कहा कि अपनी जमीन का एक इंच हिस्सा खोना भी बर्दाश्त नहीं कर सकता और सैन्य तनातनी खत्म करने के लिए सिक्किम सेक्टर के डोकलाम इलाके से पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (चीनी सेना) के सैनिकों को वापस बुलाने की संभावना खारिज कर दी.
इराक से लापता 39 भारतीयों का कोई सुराग नहीं मिल रहा है. आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (ISIS) ने मोसुल को पूरी तरह से तबाह कर दिया है. इंडिया टुडे ने इन भारतीयों की तलाश में इराक के मोसुल पहुंचा, जहां इनका कोई अतापता नहीं चला. अब यह सवाल उठ रहा है कि आखिर ये भारतीय कहां गए? इससे पहले भारत सरकार ने इन भारतीयों के जीवित होने का दावा किया था.
नरेंद्र मोदी सरकार पर तीखा हमला करते हुए कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने आरोप लगाया है. उनका कहना है कि मोदी सरकार ने प्रधानमंत्री, नौकरशाही और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की ओर से लोकतांत्रिक संस्थाओं पर ‘व्यवस्थित तरीके से कब्जा’ करके भारतीय संविधान को ‘तहस-नहस’ कर रही है.
अभी तक आप पाकिस्तान को ही कश्मीर में घुसपैठ और उसके हालात के लिए जिम्मेदार मानते रहे होंगे. लेकिन इंडिया टुडे और आजतक की यह एक्सक्लूसिव रिपोर्ट आपका नजरिया बदल देगी. आप ये जानकर हैरान रह जाएंगे कि कश्मीर को आज पाकिस्तान से ज्यादा चीन से खतरा है. 
चाइना पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर यानी CPEC के जो दस्तावेज इंडिया टुडे को हाथ लगे हैं उसे देखकर आपको यकीन हो जाएगा कि आज कश्मीर के मामले में पाकिस्तान चीन के मोहरे से ज्यादा कुछ नहीं.
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